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कार्ल मार्क्स- Karl Marx  (1818 – 1883AD) जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री औऱ राजनीतिक सिद्धांतकार

कार्ल मार्क्स को समाजवादी ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक समाजवाद का प्रणेता माना जाता है।उनका सिद्धान्त मार्क्सवाद के नाम से जाना जाता है।मार्क्सवाद एक सामाजिक,राजनीतिक और आर्थिक दर्शन है जो समाज पर पूंजीवाद के प्रभाव की व्याख्या करता है और साम्यवादी समाजवाद की वकालत करता है।

1848AD में मार्क्स और साथी जर्मन विचारक फ्रेडरिक एंगेल्स ने “द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” प्रकाशित किया,जिसमें पूंजीवाद व्यवस्था में निहित संघर्षों के स्वाभाविक परिणाम के रूप में वैज्ञानिक समाजवाद की अवधारणा को पेश किया गया है।मार्क्स ने ‘नेवे राइनिशे जीतुंग’ का संपादन प्रारंभ किया और उसके माध्यम से जर्मनी को समाजवादी क्रांति का संदेश देना आरंभ किया।लेकिन 1849 में अपने प्रखर लेखों के कारण उन्हें प्रशा से निष्कासित होना पड़ा।वह लंदन चले गए और जीवन पर्यंत वहीं रहे।

मार्क्स ने 1864 में लंदन में ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ’ की स्थापना में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मार्क्स द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को ऐतिहासिक भौतिकवाद के नाम से जाना जाता है।यह सिद्धांत बताता है कि पूंजीवाद से पहले सामंतवाद प्रचलित उत्पादन हाथ से संचालित या पशु-संचालित साधनों से संबंधित प्रभुत्वशाली और किसान वर्गों के बीच सामाजिक संबंधों के एक विशिष्ट समूह के रूप में मौजूद था।अब औद्योगिक पूंजीवाद ने इसकी जगह ले ली है।

वे कहते हैं कि मानव समाज वर्ग संघर्ष के माध्यम से विकसित हुआ है।पूंजीवाद में यह शासक वर्गों (पूंजीपति) और उत्पादन के साधनों और श्रमिक वर्गों(सर्वहारा) के बीच के संघर्ष के रुप मे प्रकट होता है।पूँजीपति सर्वहारा को नियंत्रित करता है और सर्वहारा मजदूरी के बदले में अपनी श्रम शक्ति बेचकर पूंजीपति को सक्षम बनाता है।

“दार्शनिकों ने विभिन्न तरीकों से केवल दुनिया की व्याख्या की है,जरूरत इसे बदलने की है।”

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